होम एडवांटेज मिलेगा टीम इंडिया को

आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप और टेस्ट चैंपियनशिप में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया से एक बार फिर टी-20 मैचेज में बेटर परफॉरमेन्स की उम्मीद है। वैसे टी-20 को क्रिकेट का टफेस्ट फॉर्मेट माना जाता है। इसमें फॉर्म और कंसिसटेंसी के साथ कॉन्फिडेंस बहुत ज्यादा जरूरी है। दो-चार ओवर की ताबड़तोड़ बैटिंग या फिर चार-पांच ओवर की टाईट बॉलिंग किसी भी मैच का नतीजा पलटने के लिए काफी साबित होती है। कुछेक प्लेयर्स के शानदार प्रदर्शन किसी भी मैच का समीकरण बदल सकते हैं। इसलिए इसमें पहले से किसी टीम को फेवरिट मान लेना खतरे से खाली नहीं है। हां, इंडियन और साउथ अफ्रीकन दोनों टीम्स में प्रोफेशनल प्लेयर्स की इतनी भरमार है कि हाई वोल्टेज मुकाबले की जरूर गारंटी है।

दोनों ही टीम्स कमोबेश एक सी ही यंग, एनर्जेटिक और स्किलफुल है। अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए दोनों ही टीम्स में यंगस्टर्स को मौके दिए गए हैं। इस लिहाज से टीम इंडिया लकी है जिसके पास हाइली एनर्जेटिक और इनक्रेडिबल कैप्टन के रूप में विराट कोहली मौजूद हैं, जबकि रोहित शर्मा, शिखर धवन, रविन्द्र जडेजा, रिषभ पंत और हार्दिक पांड्या जैसे टी-20 के स्पेशलिस्ट प्लेयर्स मौजूद हैं। इनके अलावा क्रुणाल पांड्या, श्रेयस अय्यर, नवदीप सैनी, दीपक चाहर और खलील अहमद जैसे यंगस्टर्स जोश से लबरेज हैं जो होम ग्राउंड पर खेल रही टीम इंडिया को कॉन्फिडेंस देंगे। उससे भी बड़ी बात यह है कि पिछले ही दिनों वेस्ट इंडीज को उसके होम ग्राउंड पर टी-20 सीरीज में 3-0 से मात देने के बाद टीम इंडिया का कॉन्फिडेंस हाई लेवल पर है।

देखने को मिलेंगे नए एक्सपेरिमेन्ट्स
वैसे धर्मशाला में संडे को होने वाले पहले टी-20 मैच से पहले कैप्टन विराट कोहली ने स्पष्ट कर दिया है कि नए यंग प्लेयर्स को अगले चार-पांच सीरीज में मौके दिए जाएंगे। यानी हर सीरीज में एक्सपेरिमेंट का दौर जारी रहेगा। इस क्रम में इंडिया के अब तक के सबसे सक्सेसफुल कैप्टल कूल महेन्द्र सिंह धोनी को वेस्ट इंडीज और साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज से बाहर रखने का फैसला यह संकेत देने के लिए काफी है कि अब माही को संन्यास लेने की प्लैनिंग करनी होगी। बहरहाल, चर्चा का यह अलग विषय है। साउथ अफ्रीका के अगेन्स्ट टी-20 सीरीज में इंडियन टीम का टॉप ऑर्डर काफी हद तक सेट है। शिखर धवन, के एल राहुल, रोहित शर्मा और विराट कोहली को रिप्लेस करता कोई यंग बैट्समैन नजर नहीं आता है। हां, शिखर धवन का वेस्ट इंडीज के अगेन्स्ट पुअर फॉर्म उनके लिए और टीम के लिए जरूर चिंता का विषय है। लेकिन उनको रिप्लेस करने के लिए के एल राहुल टीम में मौजूद हैं। इसके बाद नंबर 4,5 और 6 पर रिषभ पंत, हार्दिक पांड्या, श्रेयस अय्यर, मनीष पांडे और क्रुणाल पांड्या जैसे स्मार्ट क्रिकेटर्स टीम में शामिल हैं। इन यंगस्टर्स के बाद टी-20 के वैल्यूएबल प्लेयर के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके रविन्द्र जडेजा स्लॉग ओवर्स में अटैकिंग शॉट्स लगाने में सक्षम हैं, जबकि बॉलिंग में भी वह टीम के लिए एक इम्पॉरटेन्ट फैक्टर के रूप में नजर आएंगे।

बॉलर्स की होगी कड़ी परीक्षा जहां तक इंडियन बॉलिंग अटैक की बात है तो पेस बॉलर्स जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी के साथ चाइनामैन बॉलर कुलदीप यादव और युजवेन्द्र चहल जैसे स्टार बॉलर्स को टीम से बाहर रखकर टीम सेलेक्टर्स ने एक रिस्क जरूर लिया है। ये पांचों बॉलर्स ट्रायड एंड टेस्टेड हैं। टीम मैनेजमेंट हो या फिर नेशनल सेलेक्टर्स, सभी को पता है कि ये सभी फ्रंट लाइन इंडियन बॉलर्स हैं। इनकी जब भी जरूरत पड़ेगी, ये टीम में आकर अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। लेकिन इन एक्सपेरियेन्स्ड बॉलर्स को एक साथ टीम से बाहर रखकर नवदीप सैनी, दीपक चाहर और खलील अहमद सहित राहुल चाहर व वाशिंगटन सुंदर जैसे यंगस्टर्स पर भरोसा जताकर एक तरह से एक्सपेरिमेंट के नाम पर बड़ा रिस्क लिया गया है। टीम मैनेजमेंट भले ही दलील दे कि लगातार 140 प्लस की स्पीड से बॉलिंग कर बल्लेबाजों को चौंकाने वाले नवदीप सैनी और क्रुणाल पांड्या जैसे यंगस्टर्स ने वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि इंडिया के लिए 11 मैच खेल चुके खलील अहमद भी काफी हद तक एक टेस्टेड बॉलर हैं, लेकिन मेन टीम इंडिया के बैकअप के रूप में एक-दो बॉलर्स को तलाशने के प्रयास में आप अचानक सिर्फ यंगस्टर्स पर ही भरोसा नहीं जता सकते हैं। साउथ अफ्रीकन टीम को हल्के में लेने की चूक करना टीम मैनेजमेंट को काफी महंगा पड़ सकता है। कैप्टन क्विंटन डीकॉक, डेविड मिलर और वान डेर डसन जैसे धुरंधरों के बल्ले चल निकले तो इस यंग इंडियन बॉलिंग अटैक के सामने बड़ी प्रॉब्लम खड़ी हो जाएगी।

रिस्क लिया टीम मैनेजमेंट ने इंडियन टीम मैनेजमेंट को एक बात साफ तौर पर समझ लेना चाहिए कि आईपीएल के मंच से जिस टी-20 फॉर्मेट को एक मैटनी या नाईट शो के रूप में पेश किया गया था आज वह एक विराट रूप ले चुका है। टी-20 ही वो फॉर्मेट है जिसने बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग में एक नया आयाम रचा है। फटाफट क्रिकेट के इस संस्करण में आए दिन एक नया स्टार उभरता है और रातोंरात सुर्खियां बटोरकर क्रिकेट हॉराइजन पर छा जाता है। इस क्रम में आप किसी भी एंगल से ये नहीं कह सकते हैं कि किसी प्लेयर की स्किल में या फिर टीम में इनोवेशन की कोई कमी रहती है। हर एक बॉल को डालने और उसको खेलने के लिए प्लेयर्स के पास प्लान और स्ट्रैटेजी तैयार रहती है। इसके बावजूद एक्सपेरियेन्स्ड बैटिंग लाइन अप और सारे यंग बॉलर्स के दम पर उतरने का रिस्क लेकर इंडियन टीम मैनेजमेंट कमोबेश वही गलती दोहराने जा रहा है जो उसने आईसीसी वर्ल्ड कप के दौरान की थी। टी-20 क्रिकेट में कॉन्फिडेंस होना अच्छी बात है, लेकिन ओवर कॉन्फिडेंस कहीं न कहीं घातक भी साबित हो जाता है। दूसरा पहलू ये भी है कि टीम मैनेजमेंट इसको पॉजिटिवली लेकर चल रहा है। चूंकि टी-20 सीरीज होम ग्राउंड पर हो रही है और आईपीएल के जरिये ज्यादातर खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल के प्लेयर्स को झेल चुके हैं, उस कंडीशन में कुछ यंगस्टर्स (खासकर बॉलर्स) को इस सीरीज में अपनी सार्थकता साबित करने का मौका मिलेगा।

– प्रवीण सिन्हा

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